अब नारायण राणे को मनाने में जुटी कांग्रेस

कांग्रेस नेता राणे के बीजेपी में शामिल होने की अटकलें के बीच अब उनको मनाने की कवायद कांग्रेस ने शुरू कर दी है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने राणे को मनाने की ज़िम्मेदारी अपने दो बेहद भरोसेमंद लोगों को सौंपी है। अपने उपध्यक्ष का संदेश लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री मिलिंद देवड़ा और कांग्रेस विधायक नसीम खान ने राणे से मुलाकात की। सूत्र बताते हैं की राहुल गाँधी ने इन दोनों नेताओं को साफ़ संदेश दिया है किसी भी हालत में राणे और उनके बेटे पार्टी न छोड़ें।

इस मुलाक़ात के दौरान एक बार फिर राणे ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चव्हाण की कार्य प्रणाली को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अभी तक मेरी शिकायतों पर राहुल गाँधी ने कोई कार्रवाई नहीं की है। मैंने जो कुछ भी उनको बताया था वो पार्टी के हित में था और उनके मेरी शिकायतों का संघ्यान लेना चाहिए था। नारायण राणे से मिलने गए दोनों नेता मिलिंद व नसीम खान ने राणे से कहा कि वे पार्टी के साथ बने रहें। पार्टी को उनकी जरूरत है। और खुद सोनिया गाँधी भी नहीं चाहती की वो पार्टी छोड़ें। जल्द ही कांग्रेस में बड़ा परिवर्तन लाया जाने वाला है और उसमे नारायण राणे को तरजीह ज़रूर दी जायेगी।

बता दें की कांग्रेस के कद्दावर नेता नारायण राणे अपनी पार्टी से नाराज़ चल रहे हैं और उनकी सबसे बड़ी शिकायत अशोक चव्हाण से है।  इन्हीं शिकायतों के साथ राणे पिछले दिनों दिल्ली जाकर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात भी की थी। इस बीच बीते 12 अप्रैल को राणे ने अपने बेटे निलेश राणे के साथ भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से भी मिल चुके हैं। उसके बाद से उनके भाजपा में जाने की चर्चा तेज हो गई है।

सूत्रों के अनुसार राणे कभी भी भाजपा का दामन थाम सकते हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे के पार्टी छोड़ने की अटकलों के बीच कांग्रेस नेताओं ने इसको लेकर चुप्पी साध ली है। समझा जा रहा है कि ऐसा रणनीति के तहत किया जा रहा है। क्योंकि फिलहाल राणे के अगले कदम को लेकर भ्रम की स्थिति कायम है। पिछले दिनों अहमदाबाद में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और राणे के बीच हुई मुलाकात के बाद राणे के भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर राणे ने कांग्रेस छोड़ी तो पार्टी को कई स्टार पर झटका लगेगा। विधानसभ में वोकमज़ोर हो जाएंगे जिससे विपक्ष का नेता पद भी कांग्रेस के हाँथ से चला जाएगा। विधानसभा में राकांपा के मुकाबले कांग्रेस के पास सिर्फ एक सीट ज्यादा है और राणे के कांग्रेस छोड़ने पर उनके बेटे कांग्रेस विधायक नितेश राणे का भी पार्टी छोड़ना तय है। साथ में राणे के बेहद भरोसेमंद विधायक कालीदास कोलंबकर भी कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम सकते हैं। इतना ही नहीं कोंकण में भी कांग्रेस कमजोर हो जाएगी। हाल ही में हुए सिंधुदुर्ग जिला परिषद चुनाव में राणे की बदौलत कांग्रेस ने जीत हासिल की थी।

वहीँ राणे के सामने भी कई बाधाएं हैं, बीजेपी में शामिल होने के लिए उन्होंने अपने और बेटों के लिए कई तरह की मांग रख रहे हैं। लेकिन पार्टी के अंदर ही राणे और उनके बेटों के खिलाफ जमकर विरोध हो रहा है। खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी इतने बड़े नाम को ढोकर चलना नहीं चाहते।

 


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