सरकार कराएगी किसानों की आर्थिक स्थिति मूल्यांकन

किसानों के आंदोलन के बीच एक खबर ये भी आ रही है की कर्जमाफी के पहले किसानों की आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन होगा। और उसके बाद ही किसानों की कर्जमाफी को अमल में लाया जाएगा। इसकी बड़ी वजह की महाराष्ट्र की खराब आर्थिक स्थिति के बावजूद दबाव में राज्य की फडणवीस सरकार को किसान कर्जमाफी की घोषणा करनी पड़ी है। ऐसे में अब सरकार की कोशिश है कि केवल जरूरतमंद किसानों को ही कर्जमाफी का लाभ मिले। जिन्हें सही में इसकी ज़रुरत है।

यही वजह है कि किसानों को कर्जमाफी का लाभ देने से पहले महाराष्ट्र सरकार लाभार्थी किसानों की पूरी जानकारी इकठ्ठा करेगी। ये पता लगाया जाएगा की जिन किसानों ने क़र्ज़ माफ़ी की अर्ज़ी की है उनकी आर्थिक स्थिति कैसी है। इसके लिए सरकार ने समिति गठित कर दी है।

सूत्रों की मानें तो राज्य सरकार कर्जमाफी के लिए सभी किसानों का डाटा तैयार करेगी। इस डाटा में ज़िले, तालुकाऔर तहसील से जुडी हर जानकारी जुताई जायेगी। इसमें उनकी ये जानकारी होगी की किसान के पास उनकी खेती योग्य जमीन कितनी है और उनकी आर्थिक स्थिति आदि के बारे में जानकारी जुटाई जायेगी।

सरकार के एक मंत्री के अनुसार, पश्चिम महाराष्ट्र की अपेक्षा विदर्भ के किसानों को कर्जमाफी का कम लाभ मिलेगा। क्यूंकि वहां किसानों की स्तिथि अच्छी नहीं है। वास्तव में उन्ही इलाकों से आत्महत्या के मामले भी अधिक आते हैं। वैसे देखा जाए तो आत्महत्याग्रस्त जिलों के किसानों को कर्जमाफी का लाभ मिलना चाहिए पर राजनीतिक मजबूरीवश सरकार को सभी अल्प भूमिधारक किसानों के लिए कर्जमाफी का फैसला लेना पड़ रहा।


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