Pegasus Spyware Attack : पेगासस जासूसी मामले पर विपक्ष ने केंद्र सरकार को घेरा, जानिए कौन हुआ हैकिंग का शिकार ?

इजरायली कंपनी एनएसओ (NSO) के पेगासस सॉफ्टवेयर (Pegasus Spyware) के ज़रिए फोन हैक किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. हालांकि, सरकार ने जासूसी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए रिपोर्ट की टाइमिंग को लेकर सवाल खड़े किए हैं. दावा किया जा रहा है कि जिन लोगों के फोन टैप किए गए उनमें कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi), केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) और प्रह्लाद सिंह पटेल (Prahlad Singh Patel), पूर्व निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा (Ashok Lavasa) और चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) सहित देश के कई जाने माने पत्रकार भी शामिल हैं.

वायर की रिपोर्ट के मुताबिक, जब वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) राजस्थान की मुख्यमंत्री थीं तब उनके निजी सचिव को संभावित सर्विलांस लिस्ट में जोड़ा गया था.इसके अलावा 2014-2015 में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी (Smriti Irani) के लिए ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) संजय कचरू और प्रवीण तोगड़िया (Pravin Togadia) का नाम भी इस लिस्ट में शामिल है.

एक वैश्विक मीडिया संघ की जांच के बाद इस बात के सबूत मिले हैं कि इजराइल (Israel) स्थित कंपनी ‘एनएसओ ग्रुप (NSO Group) के सैन्य दर्जे के मालवेयर का इस्तेमाल पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और राजनेताओं की जासूसी करने के लिए किया जा रहा है. पेरिस स्थित गैर-लाभकारी संस्था फॉरबिडन स्टोरीज (Forbidden Stories) एवं मानवाधिकार समूह एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) द्वारा हासिल की गई और 16 समाचार संगठनों के साथ साझा की गई 50,000 से अधिक फोन नंबरों की सूची से पत्रकारों ने 50 देशों में 1,000 से अधिक ऐसे व्यक्तियों की पहचान की है, जिन्हें एनएसओ के ग्राहकों ने संभावित निगरानी के लिए कथित तौर पर चुना। वैश्विक मीडिया संघ के सदस्य ‘द वाशिंगटन पोस्ट (The Washington Post) के अनुसार, जिन लोगों को संभावित निगरानी के लिए चुना गया, उनमें 189 पत्रकार, 600 से अधिक नेता एवं सरकारी अधिकारी, कम से कम 65 व्यावसायिक अधिकारी, 85 मानवाधिकार कार्यकर्ता और कई राष्ट्राध्यक्ष शामिल हैं. ये पत्रकार द एसोसिएटेड प्रेस (The Associated Press), रॉयटर (Reuters), सीएनएन (CNN), द वॉल स्ट्रीट जर्नल (The Wall Street Journal), ले मोंदे (Le Monde) और द फाइनेंशियल टाइम्स (The Financial Times) जैसे संगठनों के लिए काम करते हैं. एनएसओ ग्रुप के स्पाइवेयर को मुख्य रूप से पश्चिम एशिया (West Asia) और मैक्सिको (Mexico) में लक्षित निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जाने के आरोप हैं. सऊदी अरब (Saudi Arabia) को एनएसओ के ग्राहकों में से एक बताया जाता है. इसके अलावा सूची में फ्रांस (France), हंगरी (Hungary), भारत(India), अजरबैजान (Azerbaijan), कजाकिस्तान (Kazakhstan) और पाकिस्तान (Pakistan) सहित कई देशों के फोन नंबर हैं. इस सूची में मैक्सिको के सर्वाधिक 15,000फोन नंबर हैं.

द गार्डियन (The Guardian) की ओर रविवार रात जारी इस बहुस्तरीय जांच की पहली किस्त में दावा किया गया है कि 40 भारतीय पत्रकारों सहित दुनियाभर के 180 संवाददाताओं के फोन हैक किए गए. इनमें ‘हिन्दुस्तान टाइम्स (Hindustan Times) और मिंट (Mint) के तीन पत्रकारों के अलावा ‘फाइनैंशियल टाइम्स’ (Financial Times) की संपादक रौला खलाफ (Roula Khalaf) तथा इंडिया टुडे (India Today), नेटवर्क-18( Network-18), द हिंदू (The Hindu), द इंडियन एक्सप्रेस (The Indian Express), द वॉल स्ट्रीट जर्नल,(The Wall Street Journal) सीएनएन (CNN), द न्यूयॉर्क टाइम्स (The New York Times) व ले मॉन्टे (Le Monde) के वरिष्ठ संवाददाताओं के फोन शामिल हैं. जांच में दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक पूर्व प्रोफेसर और जून 2018 से अक्तूबर 2020 के बीच एल्गार परिषद (Elgar Parishad) मामले में गिरफ्तार आठ कार्यकर्ताओं के फोन हैक किए जाने का भी दावा किया गया है.

भारत सरकार का क्या है पक्ष?
भारत सरकार ने जांच को खारिज करते हुए इसे पूरी तरह से बेबुनियाद करार दिया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) ने कहा, ”इस तथाकथित रिपोर्ट के लीक होने का समय और फिर संसद में ये व्यवधान, इसे जोड़कर देखने की आवश्यक्ता है. यह एक विघटनकारी वैश्विक संगठन हैं जो भारत की प्रगति को पसंद नहीं करता है. ये अवरोधक भारत में राजनीतिक खिलाड़ी हैं जो नहीं चाहते कि भारत प्रगति करे. भारत के लोग इस घटना और संबंध को समझने में बहुत परिपक्व हैं. उन्होंने कहा, “कल देर शाम हमने एक रिपोर्ट देखी, जिसे केवल एक ही उद्देश्य के साथ कुछ वर्गों द्वारा शेयर किया गया है. सरकार ने कहा है कि भारत में अवैध ढंग से इस प्रकार की जासूसी कराना संभव नहीं है.

यह जांच एमनेस्टी इंटरनेशनल और फॉरबिडेन स्टोरीज को प्राप्त लगभग 50 हजार नामों और नंबरों पर आधारित है. एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इनमें से 67 फोन की फॉरेन्सिक जांच की. इस दौरान 23 फोन हैक मिले, जबकि 14 अन्य में सेंधमारी की कोशिश की पुष्टि हुई. ‘द वायर’ (The Wire) ने खुलासा किया कि भारत में भी दस फोन की फॉरेन्सिक जांच करवाई गई. ये सभी या तो हैक हुए थे, या फिर इनकी हैकिंग का प्रयास किया गया था.

कंपनी का क्या कहना है?

इजरायली कंपनी एनएसओ ने जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि एमनेस्टी इंटरनेशनल और फॉरबिडेन स्टोरीज का डाटा गुमराह करता है. यह डाटा उन नंबरों का नहीं हो सकता है, जिनकी सरकारों ने निगरानी की है. इसके अलावा एनएसओ अपने ग्राहकों की खुफिया निगरानी गतिविधियों से वाकिफ नहीं है.

एक नजर सॉफ्टवेयर पर
पेगासस (Pegasus) संबंधित फोन पर आने-जाने वाले हर कॉल का ब्योरा जुटाने में सक्षम है. यह फोन में मौजूद मीडिया फाइल और दस्तावेजों के अलावा उस पर आने-जाने वाले एसएमएस (SMS), ईमेल(E-mail) और सोशल मीडिया मैसेज (Social Media Message) की भी जानकारी दे सकता है. पेगासस सॉफ्टवेयर को जासूसी (Spying) के क्षेत्र में अचूक माना जाता है. तकनीक जानकारों का दावा है कि इससे व्हाट्सएप (Whatsapp) और टेलीग्राम (Telegram) जैसे एप भी सुरक्षित नहीं है क्योंकि यह फोन में मौजूद एंड टू एंड एंक्रिप्टेड चैट (End to End Encrypted Chat) को भी पढ़ सकता है. पेगासस एक स्पाइवेयर (जासूसी साफ्टवेयर) है, जिसे इसराइली साइबर सुरक्षा कंपनी एनएसओ ग्रुप (Israeli Cybersecurity firm NSO Group Technologies) टेक्नॉलॉजीज़ ने बनाया है. इसका दूसरा नाम क्यू-सुईट (Q Suite) भी है.

क्यों खतरनाक
किसी फोन में सिर्फ मिस कॉल (Missed Call) के जरिए इसे इंस्टॉल किया जा सकता है. इसे यूजर की इजाजत और जानकारी के बिना भी फोन में डाला जा सकता है. एक बार फोन में पहुंच जाने के बाद इसे हटाना आसान नहीं होता.

कैसे काम करता है
ये एक ऐसा प्रोग्राम है, जिसे अगर किसी स्मार्टफ़ोन फ़ोन (Smart Phone) में डाल दिया जाए, तो कोई हैकर उस स्मार्टफोन के माइक्रोफ़ोन, कैमरा, ऑडियो और टेक्सट मैसेज, ईमेल और लोकेशन तक की जानकारी हासिल कर सकता है.


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