शिवसेना की बड़ी चाल,राष्ट्रपति पद के लिए आया ये चौंकाने वाला नाम।

ये तो बार बार कहा जाता रहा है भाजपा और उसकी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी शिवसेना के बीच सब कुछ ठीक नहीं है। जब कभी मौका मिलता है दोनों ही सहयोगी एक दूसरे के साथ ही शाह और मात का खेल शुरू कर देते है। यही एकबार फिर देखने को मिला है, राष्ट्रपति के लिए शिव सेना ने जिस नाम को आगे किया है उसे सुनकर तमाम राजनितिक पंडित ये मान रहे हैं की सेना ने ये भी एक चाल है ।

शिवसेना ने राष्ट्रपति पद के लिए राष्ट्रय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत का नाम सुझाया है। शिवसेना के सांसद संजय राउत ने आज कहा कि यदि देश को हिंदू राष्ट्र बनाना है तो इसके लिए मोहन भागवत का नाम सबसे उपयुक्त है। और शिवसेना को सर संचालक के नाम पर कोई आपत्ति भी नहीं है। राउत के मुताबिक़ राष्ट्रपति पद बेहद गरिमा वाला बड़ा ओहदा है और इस पद ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जो साफ-सुथरी छवि वाला हो । हमें ये जानकारी मिली है की   जिन लोगों का नाम इस पद के लिए चल रहा है उनमें मोहन भागवत भी हैं।

दरअसल इसी साल जुलाई में राष्ट्रपति चुनाव होने की संभावना व्यक्त की जा रही है जिसको लेकर भाजपा में लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी का नाम सबसे अधिक चर्चा में है।

राष्ट्रपति चुनाव पर सहयोगी दलोें के बीच सहमति बनाने के लिए प्रधानमंत्री ने डिनर का आयोजन किया है। इसमें भी शिवसेना के आने को लेकर संशय है।

प्रधानमंत्री की तरफ से एनडीए के घटक दलों के साथ अच्‍छे रिश्‍ते बनाने के लिए 29 मार्च को दिल्‍ली में प्रीति भोज का आयोजन करने वाले हैं। कहा जा रहा है इसी भोज में प्रधानमंत्री अपने सहयोगियों से राष्ट्रपति पद के नामो की चर्चा भी कर सकते हैं। लेकिन बताया जा रहा है की भाजपा से नाराज़ चल रहे
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे शामिल नहीं होंगे।

जब इस बाबत शिवसेना के वरिष्‍ठ नेता और सांसद संजय राउत  से पुछा गया तो उनका जवाब था, प्रीति भोज के लिए अभी तक प्रधानमंत्री का निमंत्रण नहीं मिला है। उन्होंने चुटकी लेते हुए ये भी कहा कि मतोश्री में भी अच्छा खाना मिलता है।

इससे पहले राष्‍ट्रपति चुनाव को लेकर भी उद्धव ने कहा था की , राष्‍ट्रपति चुनाव में अगर भाजपा को शिवसेना की मदद चाहिए तो मातोश्री में आकर चर्चा करनी होगी।  उन्‍होंने ने भाजपा को याद दिलाया कि इससे पहले दो बार मातोश्री में ही चर्चा हुई है। गौरतलब हो कि कुछ दिनों से भाजपा और शिवसेना के बीच रिश्‍ता अच्‍छा नहीं रहा है. महाराष्‍ट्र विधानसभा में कई मुद्दों पर फडणवीस सरकार के विरोध में विपक्ष के साथ खड़ी दिखी है.


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