​इस मंदिर में आंखों पर पट्टी बांधकर घुसते हैं पुजारी, ऐसा न करने पर भुगतना पड़ता है ये अंजाम

चमोली जिले में मौजूद एक मंदिर आज भी कई रहस्यों से भरा हुआ है। यहां भक्त मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकते हैं। जबकि पुजारी को भी मंदिर के अंदर जानें के लिए अपनी आखों और मुंह पर पट्टी बांधना होता है। कहते हैं कि यहां आज भी नागराज मौजूद हैं जो मणि की रक्षा कर रहे हैं। तो क्या है इस मंदिर के पीछे छिपी कहानी आइए जानते है।

यह मंदिर चमोली के देवाल में वांण नामक गांव में स्थित है। इसका नाम लाटू देवता मंदिर है। इसके अंदर जाना श्रद्धालुओं के लिए नामुमकिन है इसलिए वे मंदिर परिसर से करीब 75 फीट की दूरी से ही पूजा करते हैं।

बताया जाता है कि यह मंदिर नंदा देवी के धर्म भाई लाटू के नाम पर बनाया गया है। इस मंदिर की खासियत यह है कि इसके कपाट साल में केवल एक ही दिन खुलता है। ये अद्भुत कार्य वैशाख माह की पूर्णिमा को किया जाता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर में नागराज कई सालों से मौजूद हैं। जो अपनी अद्भुत मणि की रक्षा करते हैं। उनके इस तेज को देखना सबके बस की बात नहीं है इसलिए आम जन मानस मंदिर के अंदर नहीं जाते हैं।

मान्यता है कि इस मंदिर के प्रति सच्ची आस्था रखने वालों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यहां नागराज बहुत विशालकाय है और उनकी मणि से निकलने वाला प्रकाश इतनी तेज होता है कि इसे मंदिर के पुजारी भी नहीं देख सकते हैं। इसीलिए पुजारी को भी मंदिर के अंदर प्रवेश करने के लिए अपनी आंख और मुंह में पट्टी बांधनी होती है। कहते हैं कि ऐसा न करने से उनकी आंखों की रौशनी भी जा सकती है

जिस दिन मंदिर का कपाट खुलता है उस दिन यहां “विष्णु सहस्रनाम” एवं “भगवती चंडिका” का पाठ आयोजित किया जाता है । इस अवसर पर यहां एक विशाल मेला भी लगता है। स्थानीय लोग यहां लाटू देव को अपना आराध्य मानते हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसर देवी पार्वती, जिन्हें देवी नंदा भी कहते हैं, उनका विवाह भगवान शिाव के साथ हुआ। तब उन्हें विदा करने के लिए सभी भाई कैलाश आ रहे थे। इसमें देवी पार्वती के चचेरे भाई लाटू भी शामिल थे। तभी रास्ते में लाटू को प्यास लगी तो वो चमोली के उस गांव में रुक गया।

इस बीच लाटू को एक घर दिखा जहां उन्हें पानी का एक मटका दिखा। उन्हें लगा कि इसमें पानी है वो इसे पी गए। जबकि उसमें वहां की स्थानीय शराब थी। इसे पीते ही लाटू उत्पाद मचाने लगें। इससे पार्वती मां क्रोधित हो गईं और उन्हें वहां कैद में डाल दिया |

माना जाता है कि कैदखाने में लाटू देवता एक विशाल सर्प के रुप में विरामान हैं। जिनके साथ उनकी एक मणि भी है। उनके इस विशालकाय रूप को देखकर कोई डरे नहीं इसलिए यहां के पुजारी पट्टी बांधकर प्रवेश करते हैं।

यह मंदिर समुन्द्र तल से करीब 8500 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। यहां खूब सारे देवार के वृक्ष लगे हुए है। ये वृक्षों के बीच मौजूद एक छोटा—सा मंदिर है |


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