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सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद मामले में 40 दिन चली सुनवाई के बाद आज शनिवार को अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर बनेगा. जबकि मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही 5 एकड़ की अलग से जमीन दी जाए, जिस पर वो मस्जिद बना सकें. राम मंदिर निर्माण के लिए कोर्ट ने केंद्र सरकार को तीन महीने के अंदर ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने यह फैसला सर्वसम्मति से सुनाया.

फैसले को चुनौती नहीं देगा सुन्नी वक्फ बोर्ड

उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जफर फारुकी ने कहा कि बोर्ड अयोध्या विवाद पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर नहीं करेगा. बोर्ड की ओर से फैसले का स्वागत किया गया है और उन्होंने कहा कि हम पहले से कह चुके हैं कि सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आएगा उसे दिल से माना जाएगा. फारुकी ने कहा कि सभी को भाईचारे के साथ इस फैसले का सम्मान करना चाहिए. बता दें कि इस केस में सुन्नी वक्फ बोर्ड एक अहम पक्षकार है. फारुकी से जब पूछा गया कि ओवैसी ने इस फैसले को चुनौती देने और मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन न लेने की बात कही है तो उन्होंने कहा कि ओवैसी कौन हैं, मैं उनको नहीं जानता और न ही कभी उनसे मिला हूं.

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