किसान आंदोलन से डरे मुख्यमंत्री फडणवीस, लेकिन सांसद पूनम महाजन ने उन्हें नक्सली बताया

महाराष्ट्र के किसान सड़क पर क्या आए मुख्यमंत्री ने आनन फानन में कमिटी बना दी और किसानों को बातचीत के लिए बुला लिया। लेकिन बीजेपी के ही एक संसद को ये किसान नक्सली लग रहे हैं। उन्हें लगता है की ग्रामीण इलाकों से 180 किलोमीटर चलकर आने वाले ये किसान शहरी माओवादी हैं जो सरकार पर दबाव डालना चाहते है।

किसान आंदोलन पर मीडिया से बात करते हुए पूनम महाजन ने कहा किसान आंदोलन के रूप में लाल झंडा लेकर निकले लोग शहरी माओवादी है। जो सरकार के सर पर है। पूनम महाजन के इस बयान के बाद विपक्ष सरकार और पूनम महाजन पर हमलावर हो गया है। पूनम के इस बयां का विरोध करते हुए महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने उनसे अपना बयान वापस लेने के लिए कहा और किसानों से माफ़ी मांगने को कहा है । पूनम महाजन के इस बायां को विपक्ष 180 किलोमीटर से चलकर आये किसानों का अपमान बताया है।

तो वहीँ हज़ारों की संख्या में किसानों को देखकर महाराष्ट्र सरकार के हाँथ पांव पहले से ही फुले हुए हैं। मुख्यमंत्री के थिंक टैंक्स ने भी सरकार को आगाह कर दिया है जिन ग्रामीण इलाकों का वोट हासिल कर सरकार बनी थी। वहां अब बीजेपी बेहद कमज़ोर पड़ने लगी है।

किसानों का प्रतिनिधिमंडल विधानसभा पहुंच गया है। यहां मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मंत्रियों की समिति से किसानों की बैठक चल रही है। इस मुलाकात के बाद ही किसान फैसला करेंगे कि उनका मार्च खत्म होगा या वो विधानसभा का घेराव करेंगे।

इससे पहले विधानसभा में मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा है कि किसानों की मांग को लेकर मंत्रियों की समिति और प्रतिनिधियों के साथ चर्चा होगी और सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने ये भी कहा कि किसानों की मांगों पर एक समयसीमा तय की जाएगी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है यह केवल महाराष्ट्र के किसानों की मांग नहीं है, बल्कि पूरे देश के किसानों की यही समस्या है।


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