महाराष्ट्र के इस स्कूल में सिर्फ एक बच्चा पढता है ! और जान जोखिम में डालकर आता है टीचर

क्या कभी सुना है कि किसी स्कूल में सिर्फ एक बच्चा पढता हो और वहां टीचर रोज़ पढ़ाने भी आता हो। वो भी अपनी ज़िन्दगी खतरे में डालकर। महाराष्ट्र के इस 29 साल के शिक्षक रजनीकांत मेंढे कि जितनी भी तारीफ कि जाए शायद काम हो। रजनीकांत मेंढे नागपुर के एक सरकारी स्कूल के शिक्षक है। लेकिन जिस स्कूल में उनकी पोस्टिंग है वहां सिर्फ एक ही बच्चा पढता है। और तो और उस स्कूल तक पहुँचने के लिए हर रोज़ उन्हें अपनी ज़िन्दगी खतरे में डालकर पहाड़ियों के बीच से जाना होता है।

रजनीकांत मेढ़े का जज्बा देखिए तमाम बाधाओं के बाद भी वो हर रोज़ जान जोखिम में डालकर सिर्फ एक छात्र युवराज सांगले को पढ़ाने के लिए ड्यूटी पर पहुंचते हैं।

400 फ़ीट गहरी खाई पार कर पहुंचते हैं स्कूल

सरकारी शिक्षक रजनीकांत कि ड्यूटी जिस स्कूल में है वह पुणे के भोर के चंदर गांव में स्थित है। और उस स्कूल में पढ़ने सिर्फ एक ही बच्चा युवराज आता है. स्कूल तक पहुँचने के लिए रजनीकांत को हर रोज़ करतीब 50 किमी का सफर प्रतिदिन तय करना पड़ता है। पहले उन्हें अपने बाइक से गांव के अंदर जाने के लिए हाइवे से 12 किमी तक जाना होता है और फिर बाइक से ही 400 फीट गहरी खाई पार कर पहाड़ी रास्ते से गाँव तक पहुंचना होता है। जिस गाँव में वो जाते हैं वो पुणे से करीब 100 किलो मीटर दूर है और वहां सिर्फ 15 झोपडी नुमा घर हैं। भोर गाँव में सिर्फ 60 लोग ही रहते हैं। लेकिन वहां एक स्कूल ज़रूर है और वहीँ पिछले दो साल से गांव के रहने वाले 8 साल के युवराज सांगले पढ़ने आता है।

जुगाड़ से लगाई ई-लर्निंग क्लास

जिस भोर गाँव में रजनीकांत जाते हैं वहां रास्ता नहीं है तो बिजली कहाँ से होगी। लेकिन इस शिक्षक ने ये भी मुमकिन कर दिखाया है गांव में बिजली न होते हुए भी उन्होंने स्कूल में कुछ तारों को इस्तेमाल करके एक छोटा टीवी सेट लगाया और अपने एकमात्र स्टूडेंट को ई-लर्निंग की सुविधा दी। वो जिस स्कूल में पढ़ाने जाते हैं उसका निर्माण साल 1985 में हुआ था। स्कूल पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। एक बार तो एक सांप स्कूल की छत से उनके ऊपर गिर गया था और काट लिया था।

 


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