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खुलासा : तो इस वजह से तिरंगे में लपेटकर दी गई थी अभिनेत्री श्रीदेवी को अंतिम विदाई

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बोलीवूड की चांदनी अदाकारा श्रीदेवी का निधन होकर एक महीने से ज्यादा क समय हो गया है। अभिनेत्री का निधन दुबई के होटल में बाथ टब में डूबने से हुई थी। श्रीदेवी का अंतिम संस्कार पुरे राजकीय सम्मान के साथ मुंबई के जुहू के शमशान भूमि में किया गया था। श्रीदेवी को तिरंगे में लपेटकर उन्हें अंतिम बिदाई पर सवाल भी खड़े हुए थे। गुड़ी पाड़वा के मौके सभा को सम्बोधित करते हुए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के मुखिया राज ठाकरे ने अभिनेत्री को तिरंगे में लपेटे जाने को लेकर हमले भी किये थे। हमारे देश में जिसकी मौत शराब पीकर हुई हो उसे तिरंगे में लपेट कर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम बिदाई दी जाती है। जो शर्मनाक है.श्री देवी को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम बिदाई पर उठ रहे सवाल का जवाब अब मिल गया है।

इस सवाल का जवाब आरटीआई के जरिये आया है.आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने महाराष्ट्र सरकार के जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपोर्टमेंट (जीएडी) से सूचना के अधिकार कानून का इस्तेमाल करते हुए श्रीदेवी को दिए गए राजकीय सम्मान के बारे में विवरण मांगा था। आरटीआई कार्यकर्ता ने यह भी पूछा था कि इस सम्मान को देने का अधिकार किसके पास है? जीएडी की तरफ से जवाब में कहा गया कि अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाए, यह फैसला लेने की शक्ति मुख्यमंत्री के पास होती है। श्रीदेवी के बारे में मुख्यमंत्री के कार्यालय से 25 फरवरी को एक एक मौखिक आदेश मिला था और मुंबई उपनगर के कलेक्टर और पुलिस आयुक्त को 26 फरबरी को सरकारी आदेश के बारे में अवगत करा दिया गया था।

जीएडी की तरफ से यह जानकारी भी दी गई है कि पिछले 6 वर्षों में 41 लोगों के अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किए गए। उनमें पूर्व मुख्यंत्री विलासराव देशमुख और एआर अंतुले शामिल थे। शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे, विपासना गुरु सत्यनारायण गोयनका और दाऊदी बोहरा समुदाय के आध्यात्मिक प्रमुख सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन का भी राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया था। सरकार की प्रचार शाखा, डीजीआईपीआर के डायरेक्टर जनरल बृजेश सिंह ने कहा कि नियम के मुताबिक राजकीय सम्मान दिए जाने के बारे में मुख्यमंत्री अपने विवेक से फैसला ले सकते हैं। कुछ लोगों को जीवित रहते हुए प्रशासन या राजनीति में उनके पद को देखते हुए मृत्यु के बाद राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाता है। कुछ लोगों के प्रशासन या राजनीति में पदों को देखते हुए राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाता है। कुछ ऐसे लोगों को लेकर भी मुख्यमंत्री ने राजकीय अंतिम संस्कार का फैसला लिया जिनका नाम लिस्ट में नहीं है।

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