क्या उद्धव ठाकरे को नहीं है अपने विधायकों पर भरोसा,PA मिलिंद नार्वेरकर को बनाया बूथ एजेंट

क्या शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी में फुट को लेकर चिंतित हैं। उन्हें ये डर है की आज भी उनके पार्टी के कई विधायक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सीधे संपर्क में हैं। इन विधायकों की संख्या 20-22 है जो संकट के समय में कभी भी पार्टी का हाँथ छोड़ सकते हैं। यही वजह रही उद्धव ने कल हुए विधानपरिषद के चुनाव को देखते हुए अपने निजी सहायक मिलिंद नार्वेरकर को बूथ एजेंट बनवाया। ताकि पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ के विधायकों पर नज़र रखी जा सकेनार्वेरकर

मुख्यमंत्री की शिवसेना को चेतावनी

इन सबके बीच विधानपरिषद चुनाव में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने क्रॉस वोटिंग कराकर न सिर्फ कांग्रेस और एनसीपी को झटका दिया है। बल्कि शिवसेना को भी चेतावनी दी है। इस चुनाव में देवेंद्र ने विपक्ष के वोट तोड़कर शिवसेना को ये चेतावनी दी है कि वो बार बार शिवसेना के द्वारा दी जा रही सरकार गिराने की धमकियों से डरने वाली नही है। अगर वो सरकार से बाहर होती है तो भी उनकी सरकार सुरक्षित है।

शिवसेना मिलिंद नार्वेरकर को बनाया बूथ एजेंट

शायद प्रमुख उद्धव ठाकरे को इसकी भनक थी की चुनाव क्रॉस वोटिंग हो सकती। उनके पार्टी के विधायक क्रॉस वोटिंग न करे इसके लिए उन्होंने पार्टी की तरफ से मिलिंद नार्वेरकर को बूथ एजेंट बनाकर भेजा ताकि अपने विधायकों पर नज़र रख सके।

एमआईएम के दो विधायकों ने नही डाला वोट

वही इस चुनाव में ओवेसी की पार्टी AIMIM के विधायक वारिश पठान और इम्तियाज़ अली ने वोट नही डाला है।

नितेश राणे और कालिदास कोलंबकर कांग्रेस से बागी

जानकारी के मुताबिक विधानसभा उप चुनाव में कांग्रेस पार्टी के विधायक और कांग्रेस छोड़कर अपनी नई पार्टी का गठन करने वाले नारायण राणे के पुत्र नितेश राणे और राणे के कट्टर समर्थक के रूप में जानेजाने वाले कालिदास कोलंबकर ने पार्टी से बागी रुख अख्तियार किया है। इन दोनों ने भाजपा के पक्ष में अपना मतदान किया है।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री कांग्रेस के दिग्गज नेता नारायण राणे के इस्तीफे के बाद खाली हुई विधानपरिषद की सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा की तरफ से उम्मीदवार प्रकाश लाड़ ने कांग्रेस एनसीपी के उम्मीदवार दिलीप माने को 136 वोटों से करारी शिकस्त दी है। भाजपा अपनी नई पार्टी महाराष्ट्र स्वाभिमान पक्ष का गठन कर भाजपा नीत राजग में शामिल हुए नारायण राणे को उम्मीदवार बनाना चाहती थी। लेकिन शिवसेना नारायण राणे के उम्मीदवारी के खिलाफ थी। शिवसेना ने कह धमकी दी थी अगर भाजपा राणे को चुनाव लड़ाएगी तो वो उसके खिलाफ वोटिंग करेगी यानी कांग्रेस और एनसीपी के उम्मीदवार को अपना समर्थन देगी। जिसकी वजह से राणे की हार तो होती थी उसके साथ भाजपा का हार से किरकिरी भी होती। शिवसेना के दबाव में आने के बाद भाजपा ने प्रसाद को अपना उम्मीदवार बनाया। शिवसेना ने लाड़ को अपना समर्थन जाहिर किया। जिसके बाद लाड़ का विजयी होना निश्चित था। लेकिन चुनाव में जिस तरह क्रॉस वोटिंग हुई है उससे तो कांग्रेस एनसीपी के अलावा शिवसेना भी हैरान है।


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