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यूपी कांग्रेस के नए अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू आज से पदभार संभालने जा रहे हैं। बड़े चेहरों तक ही सीमित रहने वाली कांग्रेस पार्टी ने इस बार यूपी में एक आम चेहरे और जमीनी नेता के तौर पर पहचान रखने वाले अजय कुमार लल्लू को अध्यक्ष पद सौंपा है। उन्हें अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिलने के पीछे कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की अहम भूमिका बताई जा रही है। इस बीच पदभार ग्रहण करने के लिए अजय कुमार लल्लू गोरखपुर से लखनऊ स्टेट ट्रांसपोर्ट के बस में पहुंचे, जिसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

वहीँ इसी के साथ कांग्रेस में इस्तीफों को दौर भी शुकू हो गया है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की नवगठित समिति में नए अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू के पद संभालने से पहले ही हंगामा शुरू हो गया है। कई वरिष्ठ नेता नाराज हैं और कुछ ने तो इस्तीफे भी दे दिए हैं। कांग्रेस के पूर्व सांसद राजेश मिश्रा ने सलाहकार समिति में शामिल होने में असमर्थता जाहिर कर दी है।


उन्होंने कहा, “मैं प्रियंका गांधी वाड्रा को कोई सलाह देने की स्थिति में नहीं हूं।”


इसके बाद सलमान खुर्शीद ने ‘राहुल गांधी चले गए’ बयान दे दिया, जो प्रदेश कांग्रेस के लिए बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है।


वाराणसी से सांसद रह चुके राजेश मिश्रा प्रदेश में कांग्रेस के प्रमुख ब्राह्मण चेहरा हैं।


उनके करीबी सूत्रों ने कहा कि वह अपेक्षाकृत कम अनुभवी अजय कुमार लल्लू को कांग्रेस की प्रदेश इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किए जाने से नाराज हैं।


मिश्रा के एक करीबी सूत्र ने कहा, “प्रियंका गांधी से निकटता के कारण लोकसभा चुनावों में अजय कुमार लल्लू ने टिकट बंटवारे में प्रमुख भूमिका निभाई। हाल ही में हमीरपुर में हुए उपचुनाव में भी टिकट पर अंतिम निर्णय उन्होंने लिया और परिणाम के लिए उन्हें जिम्मेदारी लेनी चाहिए।”


वहीं, कांग्रेस की नई कमेटी के प्रति असंतोष जताते हुए कांग्रेस के पूर्व विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) सिराज मेंहदी ने पार्टी हाई कमान को अपना इस्तीफा भेज दिया है।


उन्होंने एआईसीसी और पीसीसी दोनों से इस्तीफा दे दिया है।


उन्होंने अपने दो पन्नों के पत्र में सिराज मेंहदी ने कहा है कि वे इस बात से दुखी हैं कि नई कमेटी में शिया समुदाय को शामिल नहीं किया गया है।


उन्होंने कहा, “भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) ने शिया समुदाय का एक मंत्री (मोहसिन रजा), और एक अन्य शिया बुक्कल नवाब को एमएलसी बनाया है। एक अन्य शिया नेता गैरुल हसन रिजवी अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हैं।”


उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने शिया समुदाय को पूरी तरह नजरंदाज कर दिया, जिसने हाल ही में

लोकसभा चुनाव में लखनऊ से कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद कृष्णन को बहुतायत में वोट दिया था।”

पहले से ही थे लल्लू को बड़ी जिम्मेदारी मिलने के आसार

अजय कुमार लल्लू का सफर बेहद संघर्ष भर रहा है। यूपी कांग्रेस में युवा नेताओं में से एक लल्लू जन आंदोलनों में शामिल रहे हैं। उनकी इसी पहचान को कभी राहुल गांधी ने पसंद किया और अब यूपी कांग्रेस की प्रभारी महासचिव प्रियंका गांधी ने उन्हें अपनी टीम का कप्तान बनाया है। लोकसभा चुनाव के बाद प्रियंका गांधी ने पूर्वी यूपी की कमिटियां भंग कर नए सिरे से संगठन बनाने की जिम्मेदारी अजय कुमार लल्लू को दी थी। तभी ये साफ हो गया था कि आगे लल्लू को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। पिछले दिनों में प्रदेश में हुए आंदोलनों के दौरान भी लल्लू नेतृत्व करते हुए नजर आए थे।


चार उपाध्यक्ष, 12 महासचिव

कांग्रेस ने प्रदेश में चार उपाध्यक्ष बनाए हैं। इनमें से दो को संगठन और दो को आनुषंगिक संगठनों की जिम्मेदारी दी है। उपाध्यक्ष बनाए गए वीरेंद्र चौधरी को पूर्वी यूपी संगठन और पंकज मलिक को पश्चिमी यूपी संगठन की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं ललितेश पति त्रिपाठी को प्रदेश यूथ कांग्रेस, एनएसयूआई, ओबीसी विभाग किसान कांग्रेस, महिला कांग्रेस और दीपक कुमार को सेवा दल, एससी-एसटी विभाग, अल्पसंख्यक विभाग की जिम्मेदारी मिली है।

इनके अलावा 12 महासचिव और 24 सचिव बनाए गए हैं। अहम बात ये है कि पहले यूपी प्रदेश कांग्रेस कमिटी में करीब 500 लोग होते थे लेकिन नई कमिटी में 50 से भी कम लोग हैं। समाज के सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश साफ नजर आती है। खास तौर पर ओबीसी समाज के नेताओं का प्रतिनिधित्व सबसे ज्यादा है।

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