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विख्यात गीतकार जावेद अख्तर ने कहा कि भारतीय सिनेमा की पोएट्री (poetry, काव्यात्मकता) वाली विशेषता धीरे-धीरे कम हुई है क्योंकि नये निर्देशक अपनी फिल्मों में गाने का इस्तेमाल करने से ‘शर्मिंदा’ प्रतीत होते हैं.

गीतकार ने कहा कि कई पीढ़ियां रामायण और महाभारत जैसे महाग्रंथों की कहानियां सुनती हुई बड़ी हुई हैं और यह देखना दुखी करने वाला है कि हम इसे खो रहे हैं.

अख्तर ने कहा, औसतन हिंदी सिनेमा की पटकथा एक लघु कथा के मुकाबले एक उपन्यास के निकट ज्यादा होती है. अब नयी सिनेमा लघु कथाओं की ओर बढ़ रही है और वह गानों को खारिज कर रही है. इसलिए भारतीय सिनेमा से काव्यात्मकता जा रही है और मैं इससे बहुत दुखी हूं.

जावेद अख्तर पत्रकार खालिद मोहम्मद की किताब ‘द अलादिया सिस्टर्स’ के विमोचन के मौके पर बोल रहे थे.

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